रायपुर: छत्तीसगढ़ के वन विभाग में आने वाले महीनों में होने वाले करोड़ों रुपये के सप्लाई और टेंडर को लेकर एक कथित बैठक चर्चा में है. दावा किया जा रहा है कि रायपुर के होटल हयात में 14 अक्टूबर को वन विभाग से जुड़े ठेकेदारों की एक बैठक हुई, जिसमें टेंडर की शर्तों, सप्लाई के काम के बंटवारे और कमीशन को लेकर चर्चा की गई. आरोप है कि इस बैठक में कुछ चुनिंदा ठेकेदारों के बीच काम बांटने की रणनीति पर विचार हुआ और टेंडर की शर्तें इस तरह तय करने पर चर्चा की गई, जिससे खास ठेकेदारों को फायदा मिल सके. वन विभाग में मार्च तक करीब 250 करोड़ रुपये के सप्लाई और टेंडर होने की बात भी कही जा रही है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है. अगर इन दावों में सच्चाई है, तो यह सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है.
5 स्टार होटल में ठेकेदारों की बैठक, टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
दावे के मुताबिक, 14 अक्टूबर को रायपुर के होटल हयात में दोपहर करीब 2:30 बजे से वन विभाग से जुड़े ठेकेदारों की बैठक हुई. बताया जा रहा है कि बैठक में कई ठेकेदार शामिल हुए और आगामी सप्लाई तथा टेंडर को लेकर चर्चा की गई. आरोप है कि बैठक में टेंडर की शर्तों और काम के संभावित बंटवारे को लेकर विचार-विमर्श हुआ. हालांकि, बैठक का उद्देश्य और उसमें हुई चर्चा की वास्तविक प्रकृति की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों या संबंधित पक्षों के बयान से की जानी चाहिए.
प्रियदर्शन ग्रहाचार्य की भूमिका को लेकर चर्चा
प्राप्त जानकारी में दावा किया गया है कि बैठक का नेतृत्व प्रियदर्शन ग्रहाचार्य कर रहे थे, जिन्हें आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) और जेम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) से जुड़ी प्रक्रियाओं का विशेषज्ञ बताया गया है. सरकारी खरीद और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में यदि टेंडर की शर्तें किसी खास समूह को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तय की गईं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
250 करोड़ रुपये के टेंडर और सप्लाई का दावा
आरोपों के मुताबिक, वन विभाग में मार्च तक करीब 250 करोड़ रुपये के सप्लाई ऑर्डर और टेंडर जारी होने की संभावना है. इसी संभावित कारोबार को लेकर ठेकेदारों के बीच बैठकें होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इस राशि, प्रस्तावित खरीद और टेंडर की समयसीमा की पुष्टि विभागीय निविदाओं तथा आधिकारिक रिकॉर्ड से होना जरूरी है.
खंभे, बार्बेड वायर और चेन लिंक सप्लाई को लेकर कथित रणनीति
दावे में कहा गया है कि बैठक में बिजली या अन्य उपयोग के खंभों की सप्लाई का काम सात ठेकेदारों के बीच सीमित रखने और बार्बेड वायर तथा चेन लिंक की सप्लाई का काम करीब दस कारोबारियों को देने पर चर्चा हुई. अन्य सामग्री की आपूर्ति छोटे ठेकेदारों को देने की बात भी कही गई है. यदि ऐसा कोई बंटवारा टेंडर जारी होने से पहले तय किया गया था, तो यह जांच का विषय हो सकता है कि क्या इससे प्रतिस्पर्धा और समान अवसर प्रभावित हुए.
कमीशन और एडवांस भुगतान को लेकर गंभीर आरोप
बैठक के संबंध में यह भी आरोप लगाया गया है कि कमीशन की राशि और एडवांस भुगतान को लेकर चर्चा के दौरान असहमति की स्थिति बनी. आरोपों में मंत्री के कथित हिस्से को सुनिश्चित करने के लिए कुछ लोगों को जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात भी कही गई है. इन आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन के प्रमाण और संबंधित लोगों के बयान आवश्यक हैं. फिलहाल, इन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता.
डमी ठेकेदारों के इस्तेमाल का भी आरोप
दावे के अनुसार, कुछ चुनिंदा कार्यकर्ताओं को काम दिलाने के लिए ठेकेदारों को केवल टेंडर भरने और बिल तैयार करने तक सीमित रखने की योजना पर भी चर्चा हुई. आरोप है कि वास्तविक काम दूसरे लोगों के माध्यम से कराया जा सकता है. यदि ऐसा हुआ है, तो निविदा की शर्तों, कार्यादेश, भुगतान और वास्तविक आपूर्तिकर्ताओं के रिकॉर्ड की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है.
जांच और आधिकारिक जवाब का इंतजार
वन विभाग के टेंडर में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और सरकारी धन के उचित इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण है. होटल में हुई कथित बैठक, उसमें शामिल लोगों की भूमिका, टेंडर की शर्तों और कमीशन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. संबंधित अधिकारियों और आरोपों में नामित व्यक्तियों का पक्ष सामने आने के बाद खबर को और स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है.