गुरु बालदास साहेब की बैठक के बाद GGU ने वापस लिया अग्रसेन वाटिका का भूमि आवंटन प्रस्ताव, 248वीं बैठक में फैसला निरस्त

बिलासपुर: गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर में महाराजा अग्रसेन की स्मृति में अग्रसेन वाटिका एवं प्रेरणा स्मारक के निर्माण के लिए भूमि आवंटन को लेकर उठे विवाद के बीच विश्वविद्यालय ने अपना पूर्व निर्णय वापस ले लिया है. सतनामी समाज के धर्मगुरु बालदास साहेब ने इस मामले को लेकर बिलासपुर में सामाजिक चिंतकों, वैज्ञानिकों, अधिकारी-कर्मचारियों, प्रोफेसरों, राजमहंतों और समाज के वरिष्ठजनों के साथ आवश्यक बैठक की थी. बैठक में विश्वविद्यालय की भूमि के आवंटन अथवा हस्तांतरण का विरोध करते हुए निर्णय वापस लेने की मांग रखी गई थी. इसके बाद समाज के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात कर मामले पर चर्चा की. अब विश्वविद्यालय की विद्यापरिषद की स्थायी समिति की 248वीं बैठक में 247वीं बैठक में पारित अग्रसेन वाटिका के लिए भूमि आवंटन संबंधी प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया है. वहीं, सतनामी समाज की ओर से विश्वविद्यालय परिसर में गुरु घासीदास जी की 42 अमृत वाणियां और 7 दिव्य संदेश स्थायी रूप से प्रदर्शित करने के साथ भव्य जय स्तंभ स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिसे कुलपति ने सहर्ष स्वीकार करने की बात कही.

247वीं बैठक में लिया गया था भूमि आवंटन का फैसला

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की विद्यापरिषद की स्थायी समिति की 2 अगस्त 2026 को हुई 247वीं बैठक में विषय क्रमांक 07 के तहत विश्वविद्यालय परिसर में महाराजा अग्रसेन की स्मृति में अग्रसेन वाटिका एवं प्रेरणा स्मारक निर्माण के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया था. इस निर्णय के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में इसे लेकर विरोध और नाराजगी की बात सामने आई.

धर्मगुरु बालदास साहेब ने ली बैठक

मामले को धर्मगुरु बालदास साहेब ने प्रमुखता से संज्ञान में लिया. उन्होंने बिलासपुर में समाज के वरिष्ठजनों और बुद्धिजीवियों के साथ बैठक कर विश्वविद्यालय की भूमि को किसी भी प्रकार के आवंटन या हस्तांतरण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग की. बैठक में कहा गया कि गुरु घासीदास जी के सिद्धांतों, जनहित और विद्यार्थियों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय परिसर की भूमि को लेकर ऐसा कोई निर्णय नहीं होना चाहिए.

कुलपति से मिलने के लिए बनाया गया प्रतिनिधिमंडल

भूमि आवंटन का निर्णय वापस नहीं लिए जाने की स्थिति में समाज की ओर से व्यापक विरोध की चेतावनी भी दी गई. इसके बाद कुलपति से मुलाकात के लिए एक प्रतिनिधिमंडल बनाया गया. इसमें डॉ. बसंत अंचल, कमल डहरिया, डॉ. एसएल निराला, दिनेश लहरे, जितेंद्र पाटले, डॉ. मोहन शेंडे, डॉ. पीएल आदिले, सुरेश दिवाकर, एचआर मनहर, दशेराम खांडे और जीपी भास्कर शामिल रहे.

डेलीगेट ने कुलपति से की मुलाकात

प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात कर भूमि आवंटन के निर्णय को लेकर अपनी बात रखी. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच सार्थक चर्चा हुई. प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, कुलपति ने भूमि आवंटन से संबंधित पूर्व निर्णय को अपास्त किए जाने की जानकारी दी और निरस्तीकरण प्रस्ताव की प्रति भी उपलब्ध कराई.

248वीं बैठक में विश्वविद्यालय ने वापस लिया फैसला

इसके बाद 10 अगस्त 2026 को हुई विद्यापरिषद की स्थायी समिति की 248वीं बैठक में पूर्व निर्णय को निरस्त कर दिया गया. बैठक में 247वीं बैठक में अग्रवाल समाज को उद्यान विकसित करने एवं महाराज अग्रसेन वाटिका निर्माण के लिए भूमि आवंटन से संबंधित प्रस्ताव को निरस्त करने का निर्णय पारित किया गया.

विश्वविद्यालय परिसर में गुरु घासीदास की अमृत वाणियां लगाने का प्रस्ताव

प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति के सामने विश्वविद्यालय परिसर में गुरु घासीदास जी की 42 अमृत वाणियां और 7 दिव्य संदेश स्थायी रूप से अलग-अलग स्थानों पर लगाने का प्रस्ताव रखा. इसके साथ ही परिसर में एक भव्य और सम्मानजनक जय स्तंभ स्थापित करने की मांग भी रखी गई, ताकि देशभर से यहां पढ़ने आने वाले विद्यार्थी गुरु घासीदास जी के सिद्धांतों और विचारों से प्रेरणा ले सकें.

कुलपति ने प्रस्तावों पर सहमति जताई

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, कुलपति ने इन प्रस्तावों को सहर्ष स्वीकार किया और गुरु घासीदास जी के आदर्शों के अनुरूप विश्वविद्यालय परिसर को विकसित करने की बात कही. कुलपति ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय में स्थापित गुरु घासीदास शोध पीठ के माध्यम से कई रिसर्च बुक प्रकाशित हो रही हैं.

बैठक में ये सामाजिकजन रहे मौजूद

बैठक में जितेंद्र पाटले, डॉ. एसएल निराला, डॉ. केके बंजारे, चंद्रशेखर बंजारे, सुरेश दिवाकर, विजय डहरिया, देवेंद्र गढ़ेवाल, आरएस टंडन, मधुकर घृतलहरे, नरेश घृतलहरे, अनिल बघेल, नेमसिंह बारमते, दिलहरण बंजारे, रंजीत खांडे, डॉ. मोहन शेंडे, हिरावन बंजारे, राजमहंत दशेराम खांडे, जीपी भास्कर, एचआर मनहर, एसएल जोगी, डॉ. आदिले, दिनेश लहरे, मोहन महिलांग, सुखीराम सांडे, कन्हैया मधुकर, सुकृता कुर्रे, अंजू कुर्रे, रामभजन, एसएन शिव सहित अन्य सामाजिकजन उपस्थित रहे.

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