बिलासपुर में बारिश के बीच शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाने वाली स्वच्छता दीदियों की सुरक्षा के लिए नगर निगम की ओर से वितरित किए गए रेनकोट अब सवालों के घेरे में हैं. आरोप है कि जिन बरसातियों को बारिश से बचाव के लिए स्वच्छता कर्मियों को दिया गया, उनमें से कई रेनकोट वितरण के दौरान ही खराब हालत में नजर आए. कहीं सिलाई उधड़ी हुई है, तो कहीं रेनकोट की सामग्री इतनी पतली बताई जा रही है कि उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं. कुछ बरसातियों में छेद होने की शिकायत भी सामने आई है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि बारिश में खुले आसमान के नीचे काम करने वाली स्वच्छता दीदियों की सुरक्षा के लिए खरीदी गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच आखिर किस स्तर पर की गई.
स्वच्छता दीदियों को बारिश से बचाने के लिए बांटे गए रेनकोट
नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था का काम करने वाली स्वच्छता दीदियों को ठेका कंपनी लायन लिमिटेड की ओर से रेनकोट वितरित किए गए हैं. बताया जा रहा है कि प्रत्येक रेनकोट की अनुमानित कीमत करीब 129 रुपये है. रेनकोट मिलने के बाद स्वच्छता कर्मियों को उम्मीद थी कि बारिश के दौरान उन्हें काम करने में कुछ राहत मिलेगी, लेकिन वितरण के बाद ही इसकी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने लगीं.
वितरण के दौरान ही रेनकोट में दिखे छेद और खामियां
शिकायत के मुताबिक कई रेनकोट में सिलाई ठीक नहीं है, जबकि कुछ बरसातियों में छेद भी दिखाई देने की बात कही जा रही है. इसके अलावा रेनकोट की सामग्री को भी बेहद पतला और कमजोर बताया जा रहा है. ऐसे में बारिश के दौरान ये रेनकोट स्वच्छता दीदियों को कितना सुरक्षा दे पाएंगे, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं.
बारिश में बढ़ जाती है स्वच्छता कर्मियों की जिम्मेदारी
स्वच्छता दीदियां हर मौसम में शहर की सफाई व्यवस्था को संभालती हैं. बारिश के दौरान जलभराव, नालियों की सफाई और गंदगी की समस्या बढ़ने के कारण उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है. ऐसे में खुले आसमान के नीचे काम करने वाले स्वच्छता कर्मियों को गुणवत्तापूर्ण रेनकोट और अन्य सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है.
खरीदी प्रक्रिया और गुणवत्ता जांच पर उठ रहे सवाल
रेनकोट की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद अब खरीदी प्रक्रिया और गुणवत्ता परीक्षण पर भी सवाल उठ रहे हैं. लोगों का सवाल है कि क्या रेनकोट की खरीद से पहले उनकी गुणवत्ता की जांच की गई थी? अगर जांच की गई थी, तो खराब सिलाई, पतली सामग्री और छेद जैसी खामियां सामने कैसे आईं? वहीं, यदि गुणवत्ता परीक्षण नहीं किया गया, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा में हुई लापरवाही?
बारिश के बीच शहर को साफ रखने वाली स्वच्छता दीदियों को सुरक्षा देने के उद्देश्य से बांटे गए रेनकोट की गुणवत्ता पर उठे सवालों ने नगर निगम प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि इन शिकायतों पर नगर निगम प्रशासन और संबंधित ठेका कंपनी क्या जवाब देती है और क्या खराब रेनकोट को बदला जाएगा.
डिस्क्लेमर: यह समाचार स्वच्छता कर्मियों से प्राप्त जानकारी, स्वच्छता दीदियों को वितरित किए गए रेनकोट के प्रत्यक्ष अवलोकन, उपलब्ध फोटो-वीडियो और सार्वजनिक रूप से सामने आई शिकायतों के आधार पर तैयार किया गया है. समाचार में उठाए गए आरोप और सवाल संबंधित लोगों की शिकायतों एवं प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं. इन दावों की स्वतंत्र प्रशासनिक या तकनीकी जांच अभी शेष है.